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जर्नी ऑफ सेनिटेशन हाइजिन जोश’ से बदली स्वच्छता की तस्वीर

स्वच्छ भारत मिशन की नई दिशा: एमसीबी का ‘जर्नी ऑफ सेनिटेशन हाइजिन जोश’ मॉडल

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निर्माण से प्रबंधन तक: भारत की स्वच्छता यात्रा में एमसीबी की निर्णायक पहल

अभियान नहीं, व्यवस्था: एमसीबी ने बदली राष्ट्रीय स्वच्छता की सोच
विशेष लेख: लोकेश्वर सिंह
एमसीबी/23 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत हजारों संस्थागत शौचालयों का निर्माण किया गया, किंतु समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि केवल निर्माण से ही स्वच्छता का लक्ष्य पूर्ण नहीं होता। नियमित सफाई, रख-रखाव एवं प्रबंधन के अभाव में अनेक संस्थागत शौचालय अपनी उपयोगिता खोने लगे, जिससे विद्यालयों, पंचायत भवनों एवं सार्वजनिक संस्थानों में स्वच्छता की मूल अवधारणा प्रभावित होने लगी। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले ने “जर्नी ऑफ सेनिटेशन हाइजिन जोश” के रूप में एक अभिनव पहल की, जिसने स्वच्छता को अभियान से आगे बढ़ाकर एक सतत और व्यवस्थित मॉडल का स्वरूप प्रदान किया।प्रशासनिक संकल्प से व्यवहारिक मॉडल तक की यात्रा
इस पहल की नींव जिले के कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के दूरदर्शी दृष्टिकोण में रखी गई, जिन्होंने स्वच्छता को केवल एक विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन के प्रभावी माध्यम के रूप में देखा। जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंकिता सोम के मार्गदर्शन में इस अवधारणा को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया गया। “जर्नी ऑफ सेनिटेशन हाइजिन जोश” के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि संस्थागत शौचालयों की सफाई एक नियमित, पेशेवर एवं जवाबदेह प्रणाली के अंतर्गत हो, जिससे परिसंपत्तियों की आय बढ़े और उपयोगकर्ताओं का विश्वास पुनः स्थापित हो।

प्रदेश नेतृत्व से मिली दिशा और पहचान

नववर्ष के अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा जिले के खड़गवां ब्लॉक से इस पहल का शुभारंभ किया गया, जिससे इसे राज्य स्तर पर नई पहचान मिली। यह अवसर स्वच्छता प्रबंधन की सोच में बदलाव का प्रतीक बना। पहली बार छत्तीसगढ़ में संस्थागत शौचालयों के लिए ऐसा मॉडल सामने आया, जिसमें स्वच्छता को रोजगार, सेवा और सम्मान से जोड़ा गया।

संस्थागत शौचालयों में दिखने लगा बदलाव
इस पहल के अंतर्गत जनपद पंचायत आनंद नगर, भरतपुर एवं खड़गवां क्षेत्रों में अब तक लगभग 60 संस्थागत शौचालयों की वैज्ञानिक एवं गहन सफाई की जा चुकी है। इनमें विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन एवं अन्य सार्वजनिक संस्थान शामिल हैं। सफाई उपरांत न केवल शौचालयों की भौतिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि उपयोगकर्ताओं के व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन देखा गया है।

स्वच्छता से आत्मनिर्भरता और भविष्य की राह
इस नवाचार का सबसे सशक्त पक्ष यह है कि यह स्वच्छता को आय सृजन एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ता है। वर्तमान में तीन स्वच्छता प्रहरियों द्वारा लगभग 60 संस्थागत शौचालयों की सफाई कर 12 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय अर्जित की जा चुकी है। निजी एवं शासकीय दोनों स्तरों पर इस सेवा की मांग बढ़ रही है। “जर्नी ऑफ सेनिटेशन हाइजिन जोश” आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में स्वच्छता प्रबंधन का एक स्थायी, विस्तार योग्य और प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है, जो यह सिद्ध करता है कि नवाचार, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सामुदायिक सहभागिता मिलकर सामाजिक परिवर्तन की नई इबारत लिख सकते हैं।

स्वच्छता प्रहरी
प्रारंभिक चरण में जिले के तीनों जनपद पंचायतों हेतु कुल तीन स्वच्छता प्रहरियों को संलग्न किया गया है। जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ अंतर्गत प्रतीम कुमार, जनपद पंचायत भरतपुर में लल्लू कुमार तथा जनपद पंचायत खड़गवां के लिए राजेश कुमार स्वच्छता प्रहरी के रूप में कार्यरत हैं।

स्वच्छता प्रहरियों को उपलब्ध कराई गई सामग्री
स्वच्छता प्रहरियों को जिला प्रशासन की ओर से सफाई कार्य को प्रभावी, सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से संपादित करने हेतु आवश्यक उपकरण एवं सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इसमें सफाई हेतु वॉश प्रेशर गन, हार्पिक, ब्रश, झाड़ू, फिनायल, रूम फ्रेशनर सहित सुरक्षा सामग्री के रूप में रिफ्लेक्टिव जैकेट, निर्धारित ड्रेस, गमबूट, हेलमेट, हैंड ग्लव्स एवं मास्क शामिल हैं। इन संसाधनों की उपलब्धता से स्वच्छता प्रहरियों द्वारा संस्थागत शौचालयों की नियमित, वैज्ञानिक एवं सुरक्षित सफाई सुनिश्चित हो रही है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था को स्थायित्व मिलने के साथ-साथ कार्य की गुणवत्ता में भी निरंतर सुधार हो रहा है।

सुरेश कुमार 

8770306979

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