
एमसीबी/मनेंद्रगढ़। वन मंडल मनेंद्रगढ़ के अंतर्गत वन परिक्षेत्र बिहारपुर के ग्राम चिरई पानी के जंगल इन दिनों भीषण आग की चपेट में हैं। सागौन (टेक) की नर्सरी, जिसे भविष्य की वन संपदा का आधार माना जाता है, धू-धू कर जल रही है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति में भी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौके से नदारद नजर आ रहे हैं।
🔥 नर्सरी जलकर खाक, लाखों का नुकसान
प्राप्त जानकारी के अनुसार चिरई पानी क्षेत्र की सागौन नर्सरी में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटों में सैकड़ों पौधे जलकर नष्ट हो चुके हैं, जिससे वन विभाग को लाखों रुपये की क्षति होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो यह आग आसपास के घने जंगलों को भी अपनी चपेट में ले सकती है।
❓ कहां हैं जंगल के रखवाले?
घटना के समय वनरक्षक और संबंधित अमला मौके पर अनुपस्थित पाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले कर्मचारी अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। सवाल यह उठता है कि जब नर्सरी में आग लगती है, तब भी यदि विभाग सतर्क नहीं है, तो जंगलों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
🚗 रेंजर पर भी उठे सवाल
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक संबंधित रेंजर का मुख्यालय पर नियमित रूप से निवास नहीं है। बताया जा रहा है कि वे दूसरे जिले से प्रतिदिन आवागमन करते हैं और इस दौरान शासकीय वाहन का उपयोग निजी सुविधा के लिए किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला भी है।
⚠️ प्रशासन कब लेगा संज्ञान?
लगातार बढ़ती आग और विभागीय उदासीनता को लेकर क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्रशासन आखिर कब जागेगा? क्या किसी बड़ी दुर्घटना या व्यापक वन नुकसान का इंतजार किया जा रहा है?
🗣️ ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि—
आग पर तत्काल नियंत्रण के लिए विशेष टीम तैनात की जाए
लापरवाह कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो
रेंजर की कार्यप्रणाली और शासकीय वाहन के उपयोग की जांच कराई जाए
📢 निष्कर्ष
वन संपदा किसी भी क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर होती है। यदि इसकी सुरक्षा में ही लापरवाही बरती जाएगी, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। चिरई पानी की यह घटना वन विभाग की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाते हैं।



